रविवार, जून 13, 2010

मोदी मामले में नीतीश कुमार का पाखंड सामने आया

नरेन्द्र मोदी के साथ फोटो छपने के मामले में भले ही भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने घुटने टेक दिये हो, लेकिन इस मामले में नीतीश कुमार का पाखंड खुलकर सामने आ गया हैं।पिछले 16वर्षो से भाजपा के साथ इनकी दोस्ती हैं गुजरात दंगे के समय ये बाजपेयी मंत्रीमंडल में मंत्री थे इतना ही दर्द था तो मंत्री पद छोड़ देते।




लोकसभा चुनाव के दौरान लुधियाना के जिस सभा में दोनो एक मंच पर बैंठे और कार्यक्रम के दौरान दोनो ने हाथ मिलाकर लोगो का अभिवादन किया लेकिन उस वक्त इसको लेकर नीतीश को कोई झिझक नही हुई थी ।क्यो कि बिहार में लोकसभा का चुनाव हो चुका था और ऐसा लग रहा था कि बीजेपी गठबंधन की सरकार केन्द्र में बनेगी।

नीतीश कुमार का यह चरित्र पहली बार सामने नही आया हैं लेकिन मुस्लिम वोट के खिसकने की सम्भावना को देखकर आपा खो बैंठे और उनका पाखंड खुलकर सामने आ गया।नीतीश कुमार कहते हैं जाति से उपर उठे और बिहारी बने लेकिन जरा आकड़े को देखे चालीस जिले में 33जिला के सरकारी वकील मुख्यमंत्री के विरादरी का हैं।40जिले में 30जिलो के डीएम,एसपी या फिर डीडीसी के पद पर उनके विरादरी के लोक पद स्थापित हैं।यही स्थिति एसडीओ के पद का हैं।ऐसे स्थिति में जात पात कैसे मिटेगा,
अक्सर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं पार्टी कार्यकर्ता को सम्मान देना मेरी पहली प्राथमिकता हैं लेकिन राज्य सभा चुनाव में जदयू ने जिन लोगो को टिकट दिया हैं उसमें से एक आरसीपी सिन्हा आईएस अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री के निजी सचिव रहे हैं और उनके विरादरी के भी हैं।दूसरा टिकट उपेन्द्र कुशवाहा को दिया हैं जो पिछले चार वर्ष से नीतीश कुमार को खुले मंच से गाली देते रहे हैं लेकिन जातिये गोलबंदी को देखते हुए उन्हे पार्टी में शामिल किया गया और राज्यसभा का टिकट भी दिया गया ।अब आप ही बताये की यह क्या हैं इस हलात में कैसे जाति से उपर लोग सोच सकता हैं।इनके कार्यकाल में प्रतिभा के बजाय जाति को खुलेआम तब्जो दी जाती रही हैं ऐसे एक नही सैकड़ो उदाहरण हैं चार चार मेडिकल कांलेज के प्रचार्य इनके विरादरी के हैं जिन्हे वरियता को तोड़कर पोस्टिग किया गया हैं।कई ऐसे उदाहरण हैं अगर लिखा जाये तो कितने पेज भर जायेगे।

नीतीश कुमार के इन्ही पाखंड के कारण मैं इनका आलोचक रहा हू और मेरा मानना हैं कि, नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के कुशासन के खिलाफ बिहार में पहली बार विकास के नाम पर गोलबंद हुए जनता के साथ विश्वास घात किया हैं।मोदी वाले मामले को ही ले बिहार में विकास जब ऐजंडा हैं और गांव गांव में सड़के बनी हैं कानून व्यवस्था में काफी सुधार हुआ हैं पूरे सूबे में इसकी चर्चा हैं। और एक बार नीतीश कुमार को और मौंका देने की बात कर रहे हैं। लेकिन जिस तरीके से मोदी के बहाने मुस्लिम तुष्टीकरण के राजनीत को हवा देने का काम नीतीश कुमार ने किया हैं उसका नुकसान आने वाले समय में नीतीश कुमार को झेलनी पड़े तो कोई बड़ी बात नही होगी।

1 टिप्पणी:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

नेताओं द्वारा जातिवाद के खिलाफ बोलना ढकोसला मात्र है चाहे कोई भी दल क्यों न हो चुनावों में सभी जातीय समीकरण के आधार पर टिकट वितरण करते है |
ये तुष्टिकरण पता नहीं ये नेता लोग कब छोड़ेंगे ?