गुरुवार, जनवरी 05, 2012

मुझे कुछ कहना है

किसी खबर के सिलसिले में फोनिंग चल रहा था ।इस दौरान एक अपरिचित नम्बर से लगातार फोन आ रहा था, जैसे ही फोनिंग खत्म हुआ उस नम्बर पर फोन किया।फोन के रिसिव होते ही सामने वाली बरस पड़ी ।जब तक कुछ समझ पाते जो कुछ नही भी बोलने चाहिए बोलती चली गयी पुरुष होता ही ऐसा है ।एक स्वर से बोली जा रहा थी अचानक आवाज पहचान में आ गयी अरे कैसी हो इतने दिनो बाद मेरा नम्बर कैसे मिला। अच्छा तो अब तुम मुझे पहचाने ।मैने कहा अरे बाबा ऐसी कोई बात नही है फोनिंग चल रहा था इसलिए फोन काट कर बात नही क्या छोड़ो बात क्या है।देखो आदित्य आज कल मेरे साथ बड़ा ही बुरा वर्ताव कर रहा है। क्यो, ऐसा क्या हो गया फोन करो तो बात नही करता मेरा ख्याल नही रखता है घर में अकेली बैठी बोर होती रहती हूं आफिस फोन करु तो डपट देता है। तुम्हे तो वह दिन याद होगा किस तरह कांलेज में मेरे लिए पलके बिछाये रहता था अब स्थिति यह है कि हमसे ठिक से बात तक नही करता है ।पाच मिनट में आदिय्त को पूरी तरह धो डाली लगा ऐसा जो आदित्य जैसा बूरा इंसान इस जहां में कोई और नही है।जब भी आदित्य का पंक्ष रखना चहता था कि वह भड़क उठती थी और बस एक बात सारे पुरुष एक जैसे होते है।मैने प्यार से बोला देख यह सिर्फ तुम्हारी समस्या नही है यह समस्या पूरी आंधी आबादी की है ।देख अपना बचपन याद कर मा पापा के सबसे लाडली तुम रही होगी पूरे परिवार का केन्द्र विन्दु रही होगी।जैसे जैसे बड़ी हुई चाहने वालो की लम्बी सूची तैयार हो गयी  होगी ।घर के नौकर से लेकर ड्रायवर औऱ फिर कोचिंग जाने के रास्ते तक पलके बिछाये लोग तुम्हारा इंन्तजार करते हो यह सिलसिला वर्षो चली होगी ।फिर  कांलेज आय़ी तो प्रो0 से लेकर सीनियर औऱ बेचमेट के ऐटेशन में रही फिर जीवन में आदित्य की तरह चाहने वाले कई लोग आये आज भी वो लोग तुमको उसी तरह पलके बिछाये याद करते होगे।लेकिन शादी के बाद धीरे धीरे चाहने वालो की फेहरिस्त छोटी होने लगी होगी । औऱ एक समय बाद सिर्फ तुम बच जाती हो। यह हर किसी के जीवन में आता है ।हर लड़किया अपने दायरे में सेलिब्रेटी होती है । इस सेलिब्रेटी वाली सोच से बाहर निकलने की जरुरत है  दुनिया फिर विंदास है ।इतना कहना था कि वह पूराने रंग में आ गयी और फिर शुरु हो गयी दिल्ली विश्व विधालय के कैंटीन की कहानी जहां पहली बार आदित्य से मिली थी

4 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आपको लोहड़ी हार्दिक शुभ कामनाएँ।
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कल 13/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

vidya ने कहा…

शायद सच कहा आपने...
शुभकामनाएँ

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सटीक विश्लेषण

Rajesh Kumari ने कहा…

achcha vakayaa ka vivran padha bahut achcha laga.shubhkamnayen.