गुरुवार, सितंबर 30, 2010

आज तो मीडिया की अग्निपरीक्षा है

कल जब मोरनिंग डियूटी से घर में जैसे ही प्रवेश किया मेरी बेटी श्रेया बोली पापा आज आफिस से बड़ी जल्दी आ गये हंगामा होने वाला है तो फिर आप आ कैसे गये।मैंने पुछा किसने कहा हंगामा होने वाला है मेंम बोली है कि हंगामा होने वाला है इसलिए कल स्कूल बंद रहेगा।लगभग पाच दस संकेंड तक बाते समझ में नही आयी हंगामा किस बात का अचानक याद आया अरे, कल अयोध्या पर फैसला आने वाला है।मैं जोर से हस पड़ा ऐसा कुछ नही है ,लेकिन हंगामा होने वाला है तो पापा की छुट्टी केनलिस हो जायेगी यह बात मेरी पाच वर्ष की बेटी सोच रही है यह देख कर मैं हैरान जरुर हो गया क्या जिदंगी हमलोगो कि है ।

खेर हमलोगो के चैयरमेन की और से संख्त हिदायत है कि अयोध्या मसले पर खबर दिखानी ही नही इसको लेकर कई बैंठके भी हो चुकी है जिसके कारण इस और ध्यान गया भी नही। वही दूसरी और बिहार विधानसभा चुनाव के कारण परेशनी इतनी बढ गयी है कि चैनल की कौन कहे अखबार भी ठिक से नही देख पा रहे है।

आज सुबह 9बजे के करीब हमारे एक पत्रकार मित्र का दरभंगा से फोन आया क्या सोये हुए है मैने कहा है आज नाईट डियूटी है आराम से आफिस निकलना है इसलिए सो रहे है पटना का क्या हाल है मैने कहा सब कुछ ठिक है। अरे भाई यहां तो आज दुकान खुली ही नही है सारा स्कूल कांलेज बंद है सड़क पर दूर दूर तक आदमी दिखायी नही दे रहा है पूरी और रैभ फ्लेंग मार्च कर रहा है मैंने कहा सही बात है क्या पटना में ऐसा नही है मैने कहा ऐसा कुछ नही है मोबाईल रखते ही बिहारशरीफ से फोन आया ऐ सर यहा बहुत तनाव है कभी भी कुछ भी हो सकता है कई राउंड पत्थरबाजी होते होते बचा है खबर लिखाना है क्या, नही नही कोई खबर नही चलाना है। भाग कर टीवी के पास गया और न्यूज चैनलो का बटन दबाने लगा आज तक,इंडिया टीवी और बिहार के कुछ रिजनल चैनल को छोड़कर अधिकांश चैनल सकारात्मक खबरे चला रहा था बेहद सकून महसूस हुआ।आज बीबीसी से भी उम्मीद की जानी चाहिए कि इस तरह की खबड़े नही चलाये,

मीडिया और खासकर भिजुल मीडिया के लिए आज का दिन बेहद कठिन और चाईलेनजिंग हैं क्यो कि आज सब कुछ उसके स्क्रीन पर निर्भर करता है।उम्मीद है मीडिया इस जिम्मेवारी पर खड़े उतरेगी और अफवाह फैलाने वाले को तरजीह नही देगी।

और अंत में आज बिहार में जितिया पर्व है माँ अपने बेटे के सलामति के लिए यह पर्व करती है जिसमें 36घंटे तक महिलाये अन्न और पानी लिए बिना रहती है। मैं इस तरह के पर्व का घोर विरोधी हूं लेकिन आज पत्नी और माँ दोनो को पूजा पर जाने से पहले कहा कि आज अपने बेटे की सलामति के साथ साथ सूबे के सभी हिन्दू मुस्लिम माँ के बेटे की सलामति की दुआ करना।

उन्मादी तत्व सफल न हो इसी कामना के साथ जय हिन्द---






4 टिप्‍पणियां:

nilesh mathur ने कहा…

सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे!

सागर ने कहा…

आप एकदम खालिस बिहार पत्रकार हैं, उसी रंग में ज़मीनी बात लिखते हैं.... यहाँ प्रिंट मीडिया में भी सकारात्मक खबरें ही हैं.. टी वी नहीं नहीं जानता .... तहलका ने १८६२ का एक उद्धरण दिया है जब अयोध्या को जी लगा कर और मस्जिद के देख रेख महंत करते थे. ढेर सारी एकता की बातें लिखी हैं.. हिंदुस्तान ने भी कुछ ऐसा ही छापा है उम्मीद है लोगों में माकूल सन्देश जायेगा ... इंडिया टुडे भी ऐसी ही बात कहता है इस तर्क के साथ की अब बेवकूफ बनाए का ज़माना चला गया. जितने आग उगलने वाले नेता थे सब जान गए हैं की अब उनकी दाल नहीं गलने वाली...

आज बिहार में जितिया पर्व है माँ अपने बेटे के सलामति के लिए यह पर्व करती है जिसमें 36घंटे तक महिलाये अन्न और पानी लिए बिना रहती है। मैं इस तरह के पर्व का घोर विरोधी हूं लेकिन आज पत्नी और माँ दोनो को पूजा पर जाने से पहले कहा कि आज अपने बेटे की सलामति के साथ साथ सूबे के सभी हिन्दू मुस्लिम माँ के बेटे की सलामति की दुआ करना।

और इस बात के लिए ह्रदय से आमीन.

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
चक्रव्यूह से आगे, आंच पर अनुपमा पाठक की कविता की समीक्षा, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

prahlad ने कहा…

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