गुरुवार, मई 27, 2010

आँनर किलिंग को लेकर हदे पार कर रहे हैं,प्रियभांशु एंड कम्पनी


प्रियभांशु एंड कम्पनी सारी मर्यादाओ को ताख पर रख कर किसी भी स्थिति में निरुपमा की मौंत को आँनर किंलिग साबित करने में लगे हैं।झारखंड के डीजीपी पर दबाव डलवाने के साथ साथ अखवार और मीडिया का जितना भी दुरउपयोग हो सकता हैं किया जा रहा हैं।स्थिति यहां तक पहुंच गयी हैं कि निरुपमा मामले में सवाल खड़े करने पर ब्लांगर को माँ बहनो को गाली दी जा रही हैं।पता नही प्रियभांशु एंड कम्पनी प्रियभांशु के साथ किस जनम का बदला ले रहे हैं।उन सबो के व्यवहार ने कही न कही एक ऐसा वर्ग तैयार कर दिया हैं जो इन सबो से किसी भी स्थिति तक जबाव देने की तैयारी प्रारम्भ कर दी हैं।इसी का परिणाम हैं कि कोडरमा में पिछले चार दिनो से निरुपमा के माँ के मामले में लोग खुलकर सामने आने लगे हैं।


जिस तरीके से तथाकथित जनवादी विचार धारा के परोकार इस मामले को ब्रह्रामण जाति से जोड़कर पूरे मामले को जाति में बाँट दिया हैं उसका फायदा कही न कही निरुपमा के असली हत्यारे को मिलता दिख रहा हैं।अब जरा प्रियभांशु एंड कम्पनी के कारगुजारी पर चर्चा हो जाये—

1-निरुपमा मामले में प्रियभांशु एंड कम्पनी झारखंड के डीजीपी पर दबाव बनाने के लिए कांग्रेस के एक बड़े नेता से लगातार फोन करवा रहे हैं।

2-कोडरमा एसपी को उसके बैंचमेंट यूनियन टेरेटरी केंडर के एक आईपीएस अधिकारी से लगातार फोन करवाया जा रहा हैं।उससे भी बात बनते नही देख शहाबुद्दीन मामले में चर्चा में रहे एक आईपीएस अधिकारी से भी फोन करवाया गया हैं जो इन दिनो सेट्रल डीपटेशन पर दिल्ली में हैं कोडराम पुलिस और झारखंड पुलिस मुख्यालय में तैनात आलाधिकारी की माने तो ऐसा एक भी दिन नही गुजरता जब किसी न किसी आईपीएस अधिकारी का फोन नही आता हो आखिर ये चाहते क्या हैं।

3-मीडिया की बात करे 25मई को सभी चैनलो ने ब्रेकिंग खबर चलाया कि निरुपमा की माँ ने जमानत याचिका दायर की जबकि यह खबर पूरी तौर पर गलत था जमानत याचिका 26मई को दायर किया और 28मई को इस पर सुनवाई होगी कल जब ये बाते सामने आयी तो कई चैनलो पर खबर ब्रेक हुआ निरुपमा की माँ को नही मिली जमानत 28मई को होगी सुनवाई अब आप ही बताये इस खबर का क्या मतलब हैं।झारखंड के अखबारो में दिल्ली से खबर छपती हैं कि निरुपमा मामले में कोई भी कांग्रेसी नेता आन्दोलन नही करेगे।एक अखबार ने खबर छापा फौरेन्सिंक जांच रिपोर्ट ने निरुपमा की हत्या की पुष्टी की।

4-मोहल्ला में रीतेश जितने तार्किक अंदाज में लिख रहे हैं उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है,बयान बदलने का ही नतीजा हैं कि सुधा पाठक जेल में हैं और उसके परिवार संदेह के घेरे में हैं लेकिन पूरे मामले का जो सबसे मजबूत पहलु हैं वह यह हैं कि घटना के लगभग एक माह बाद भी पुलिस को हत्या को लेकर कोई सांक्ष्य नही मिल पा रहा हैं।

5-कोडरमा पुलिस निरुपमा के भाई के पाच दोस्तो से भी पुछताछ किया हैं एक बीएसएफ में पदस्थापित हैं वे अपने पोस्टिंग वाले जगह पर ही घटना के दिन मौंजूद थे यही स्थिति बैंक में तैनात एक दोस्त का हैं।पुलिस को दोस्त से भी कोई सुराग नही मिला हैं।

6-निरुपमा के मामा के पंक्ष में पुलिस को ऐसा साक्ष्य मिला हैं जिसे तोड़ना सम्भव नही हैं।घटना के दिन बाढ के जिस ऐटीएम से पैंसा निकाला हैं उसमें लगे थ्रिसीसीडी कैमरे में उसका फोटो हैं।इसलिए मामा पर जारी अनुसंधान पुलिस को बंद करनी पड़ी हैं।

7-यही स्थिति निरुपमा के पिता,और भाई के मामले में सामने आयी हैं उसके बाद पुलिस ने उन विन्दुओ पर भी अनुसंधान बंद कर दिया हैं।

8-पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर जारी बहस पर भी पुलिस ने विराम लगा दिया हैं।पुलिस इस मसले पर कुछ भी लिखने को तैयार नही हैं ।पोस्टमार्टम करने वाले डांक्टर नोटिस जारी होने के बाद भी पुलिस के सामने उपस्थित नही हुए जो पुलिस ने कांड दैनकी में अंकित कर लिया कर लिया गया हैं।वही कोडरमा के सिविल सर्जन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अभी तक रांची एक्सपर्ट के पास ओपेनियन के लिए नही भेजा हैं.।

9-मीडिया में फौरेन्सिंक रिपोर्ट आने की खबर के बाद तिलैया थाना के थाना अध्यक्ष ने विधिवत थाने में तैनात सिपाही राजू मिंज को कमान देकर रांची फौरेन्सिंक लैंब भेजा लेकिन लैंब के निदेशक ने लिखित सूचना दी हैं कि अभी तक किसी भी तरह की फौरेन्सिंक जांच पूरी नही हुई हैं।थाने के स्टेशन डायरी में भी इस तथ्य को दर्ज कर दिया गया हैं।

10-फौरेन्सिंक लैंब के आलाधिकारी के हवाले से जो बाते सामने आ रही हैं पूरी रिपोर्ट आने में तीन से चार माह का समय लग सकता हैं।ऐसा हुआ तो कोडरमा पुलिस निर्धारित 90 दिनो के अंदर चारशीट दायर नही कर पायेगी,ऐसे हलात में निरुपमा की माँ को जमानत मिल जायेगी।

11-दिल्ली वाले हल्ला पार्टी से मेरी एक विनती हैं अगर निरुपमा मामले में सच को सामने लाना चाहते हैं तो इस तरह से ब्लांग पर आकर तर्क वितर्क करने और मोमवती जलाकर इंडिया गेट तक मार्च करने से कुछ भी मिलने वाला नही हैं। वही जनवादी सोच रखने मात्र से कानून आपके दलील को नही मान लेगी। आप रांची आये लेकिन खुले दिमाग से हत्या या आत्महत्या की मानसिकता से उपर उठकर ।प्रधानमंत्री के चाहने पर भी मामला की सीबीआई जांच नही हो सकती हैं।राज्य में जारी राजनैतिक संकट के समाप्त होने का इन्तजार करे।आप लोगो ने जो क्रिमनल पेटिशन फाईल किया हैं उस पर सुनवाई होने में इतना वक्त लग जायेगा कि न्याय का कोई मतलब नही रह जायेगा।प्रियभांशु या फिर आपका जो संकठन हैं रांची हाईकोर्ट में आवेदन दे और मामले की सीबीआई जांच की मांग करे।ये दिल्ली हाईकोर्ट में भी हो सकता हैं।

12-पुलिस हत्या साबित करने में जिस तरह से असफल हो रही हैं ऐसे हलात में प्रियभांशु का जेल जाना तय हैं अगर कानूनी प्रक्रिया तेज हुई तो प्रियभांशु को सजा भी हो सकती हैं ।जिस तरह के साक्ष्य निरुपमा के घर वाले पुलिस के सामने पेश कर रहे हैं वह प्रियभांशु की मुश्किले बढा सकती हैं।निरुपमा के पिता ने प्रियभांशु के पिता से तीन बार मोबाईल पर बातचीत किया हैं। अब ये कह रहे हैं कि प्रियभांशु के पिता से शादी के सिलसिले में मिलने को लेकर बात हुई थी लेकिन उन्होने शादी के प्रस्ताव को पूरी तौर से खारिज कर।यह सबूत जनवादी नही हैं इस साक्ष्य को कांटने के लिए प्रियभांशु को बड़ी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती हैं।ऐसे कई साक्ष्य पुलिस ने भी संकलित किया हैं जिससे प्रियभांशु की मुश्किले बढ सकती हैं।

10 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

संतोष जी ,
इस पोस्ट को पढ कर कोई भी आसानी से समझ सकता है कि आखिर हो क्या रहा है इस मामले में । मगर जानते हैं एक बात का अफ़सोस अब हमेशा ही रह जाएगा कि इसका हश्र भी आरूषि कांड जैसा ही होगा कुछ कुछ । समय बीतने के साथ ही सब कुछ और बडे गडबडझाले में बदल जाएगा । हो ह्ल्ला करते रहने से और कुछ हो न हो कम से कम प्रियभांशु के लिए तो इतना रास्ता हो ही जाएगा कि वो बेचारा पुन: किसी से प्रेम करके एक नई शुरूआत कर सके ।

आपकी रिपोर्टिंग का जवाब नहीं है ।

माधव ने कहा…

its is horrible

सुनील दत्त ने कहा…

शर्मनाक के सिवा क्या कहें ।इलीलिए कहा गया है चोर की दाड़ी में तिनका। जिस कातिल ने सबूतों से छेड़छाड़ की वो खुद रिमांड से बचने के लिए ये सारा खेल खेल रहा है। इसके रिमांड पर चड़ते ही सारी गुथी सुलझ जाएगी।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

ये लम्पट पार्टी अपनी गिरेबान बचाने के लिए हर हथकंडे अपना रही है यदि ये दोषी नहीं है तो इन्हें डर काहे का !ताकि इसे ओनर किलिंग से जोड़ कर अपनी करतूतों पर पर्दा डाला जा सके | इन्हें तो पुलिस जांच का भी इंतजार नहीं |
अब तो इस लम्पट पार्टी के गुर्गे इनके खिलाफ टिप्पणियाँ करने वालों को भी धमकाने के अंदाज में फोन कर रहें है साथ ही ये चूहे डर भी रहें है कि ये फोन कोई टेप ना करलें |

Arvind Mishra ने कहा…

प्रियभान्शु की नयी गर्ल फ्रेंड कौन है ?

राजू जेंटलमैन ने कहा…

संतोष जी,
रीतेश के तर्कों की आप प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन वह ऐसे लिख रहा है जैसे उसके सामने ही सबकुछ हुआ। सच तो यह है कि निरूपमा की मौत भूमिहारवाद के बहाने ब्राह्मणवाद को गाली देने का बहाना बन गई है। इसमें जितने लोग सक्रिय हैं, वे सभी भूमिहार हैं और नाम बदल-बदल कर वेबसाइटों पर कमेंट कर रहे हैं। उनका कम्युनिज्म इसी बहाने जाग रहा है। रीतेश भूमिहार, आनंद प्रधान भूमिहार, रामबहादुर राय भूमिहार, हिमांशु शेखर भूमिहार, दीपक कुमार भूमिहार और इन सारे भूमिहारों के साथ एक दिलजला दिलीप मंडल भी मिल गया है, जिसे ब्राह्मणों को गाली देने में मजा आता है। हालांकि जब वह सीएनबीसी चैनल के हिंदी सेक्शन का दिल्ली हेड था तो मुजफ्फरपुर का एक भूमिहार लड़का उससे नौकरी मांगने गया। जब उसे पता चला कि लड़का भूमिहार है तो उसने अजीत अंजुम भूमिहार, चीफ न्यूज 24, उदयशंकर भूमिहार, स्टार इंडिया, संजय सलिल भूमिहार का नाम उसे सुझा दिया। दिलीप ने उस लड़के से कहा कि आप भूमिहार हैं और इन भूमिहारों से नौकरी मांगिए। अब मुद्दा देखिए कि कम्युनिज्म जगाने और ब्राह्मणों को गाली देने के लिए वह भूमिहार खेमे का अगुआ बन गया है। इसलिए यह कहना कि रीतेश तर्कपूर्ण लिख रहा है, बिल्कुल गलत है। आपने उसकी कुछ ज्यादा ही तारीफ कर दी है।

Rajnish ने कहा…

१२) पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बहुत कुछ छुट गया है लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत नहीं है जैसा की एम्स के डॉक्टर ने माना है| कुछ लोगों का कहना है की पोस्टमार्टम करने वाला पहली बार पोस्टमार्टम कर रहा था इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत है आपको पता होना चाहिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट तीन डॉक्टर ने मिलकर तैयार किया है जिनमें से सिर्फ एक डॉक्टर पहली बार पोस्टमार्टम कर रहा था बाकी दो डॉक्टर एक्सपेरिएंस होल्डर था |
१३) पोस्टमार्टम के बाद जब पता चला की बिसरा को सुरक्छित नहीं रखा गया है तो डॉक्टर ने तुरंत डेड बॉडी की खोज शुरू कर दी थी लेकिन तब तक डेड बॉडी को जला दिया गया, आखिर घर वालों को इतनी जल्दी क्यों की, इतनी जल्दी में डेड बॉडी तभी जलाया जा सकता है जब पहले से ही तैयारी की जा चुकी हो लेकिन निरुपमा के भाई और पिताजी तो घर पे थे ही नहीं तो फिर इतनी जल्दी तैयारी किसने और कैसे कर दी |
१४)निरुपमा को झूठ बोल कर धोखे से घर क्यों बुलाया गया ?
१५)अगर निरुपमा ने आत्महत्या की तो क्या दिल्ली में आत्महत्या करना मना है जो निरुपमा ने कोडरमा में घर जाकर आत्महत्या कर ली|
१६)प्रियभांशु के पिताजी ने कहा था की निरुपमा को २८ अप्रैल को बाथरूम में बंद कर दिया गया था, निरुपमा के पिताजी का कहना है की उसने खुद ही अपने आपको बाथरूम में बंद कर लिया था, निरुपमा के पिताजी को यह कैसे पता की निरुपमा ने खुद अपने आपको बाथरूम में बंद कर लिया है क्यों वह तो २८ अप्रैल को घर पर थे ही नही जैसा किसी उन्होंने कहा |
१७)उसी दिन निरुपमा ने प्रियभांशु को एसएम्एस भेजा था की उनके पिताजी, माँ और भाई ने उसे बाथरूम बंद कर रखा है, तो क्या निरुपमा झूठ बोल रहा थी ??
१८) निरुपमा के मौत के बाद निरुपमा की माँ ने झूठ कहा की निरुपमा की मौत करेंट लगने से हो गयी कहीं ऐसा तो नहीं की निरुपमा को बाथरूम में बंद करके उसे इलेक्ट्रिक का शौक दिया गया ताकि वह अपना सुसाइड नोट खुद अपने राइटिंग में लिखे |
१९)निरुपमा की मौत अप्रैल में हुई जबकि पुलिस ने उसके कपडे और किताब १२ मई को अपने कब्जे में लिया और १६ मई को फोरेंसिक को जांच करने के लिए भेजा आखिर पुलिस इतने दिन क्या सबूत मिटाने का इंतज़ार कर रही थी ?
२०) पुलिस ने निरुपमा का लैपटॉप भी कब्जे में ले रखा है लेकिन अभी तक उसकी जांच तक नहीं की गयी अभी तक निरुपमा के लैपटॉप को खोला तक नहीं गया क्यों ???
२१) कुछ लोगों का कहना है की प्रियभांशु ने सबूत मिटने के लिए लैपटॉप को फॉर्मेट कर दिया, आपको पता होना चाहिए सिस्टम को फॉर्मेट करने के बाद भी उसके सारे प्रिविअस डाटा को रिकवर किया जा सकता है |
२२) प्रियभांशु सिर्फ इतना चाहता है की इसकी जांच सीबीआई करे तो इस में गलत क्या है और अगर इसके लिए वह नेता लोगो से रेकुएस्ट कर रहा है तो इस में बुराई क्या है ?
२३) निरुपमा के पिताजी कोडरमा के विधायक को साथ में लेकर पुलिस थाना गए थे निरुपमा की माँ को जेल से छुड़ाने के लिए , आप यही कहना चाहते हैं न की निरुपमा के माँ भाई और पिताजी निर्दोष है तो फिर इनको विधायक की क्या जरूरत पर गयी, क्या इशे पुलिस पे दवाब डालना नहीं कहेंगे ?

Rajnish ने कहा…

संतोष जी,
मैं आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ
१) अगर निरुपमा के मामा बाढ़ में थे तो २९ अप्रैल को अंकिता (जो की निरुपमा की दोस्त थी ) को फ़ोन करके किसने बताया की निरुपमा की मौत करेंट लगने से हो गयी,क्योंकि फ़ोन करने वाले ने कहा था की वोह निरुपमा का मामा है, और ये बात सिर्फ अंकिता को ही क्यों बताया गया ? उसके बाद अंकिता ने ही प्रियभांशु को फ़ोन करके बताया की निरुपमा की मौत करेंट लगने से हो गयी |
२) आपको पता होना चाहिए, निरुपमा का भाई और निरुपमा के पिताजी २७-२८ अप्रैल को ऑफिस से छुट्टी पे थे क्यों क्या दोनों एक ही दिन पार्टी करने वाले थे ?(पुलिस को यही पता चला था जब पुलिस पूछताछ के लिए मुंबई और गोंडा गयी थी )
३)आपने मोबाईल लोकेशन की बात की थी आपको पता होना चाहिए मोबाईल लोकेशन के बारे में आज के डेट में बच्चा बच्चा जनता है की पुलिस घटना के बाद सबसे पहले मोबाईल लोकेशन ही पता करती है |
४)सबसे महत्वपूर्ण सवाल, निरुपमा की वापसी दिल्ही का रेजेर्वेसन किसने और कब कैंसल करवाया ? क्योंकि निरुपमा के घरवाले तो कोडरमा में थे ही नहीं जैसा की आपने कहा
५)अगर निरुपमा ने आत्महत्या की तो निरुपमा को मोबाईल कहाँ है, लोग उसके मोबाईल को क्यों छिपा रहें हैं ?
६)पुलिस ने एसएम्एस और कॉल डिटेल की जांच परताल के बाद कहा था की एसएम्एस के साथ टेम्परिंग नहीं हुई है और उनके पास एसएम्एस की ओरिजिनल डिटेल भी है, अगर आपने निरुपमा के एसएम्एस को पढ़ा है तो आपको पता होगा की निरुपमा को बाथरूम में जाकर एसएम्एस भेजना पड़ता था जब निरुपमा के भाई और पिताजी घर पैर नहीं थे तो फिर निरुपमा पर लगातार कौन नज़र रख रहा था, जिसके वजह से निरुपमा को बाथरूम में जाना पड़ता था एसएम्एस भेजने के लिए |
७) आप निरुपमा के 'सुसाइड नोट' के बारे में बात करते हैं, आपको पता होना चाहिए लेसर प्रिंटिंग से किसी के हैण्ड राइटिंग में कुछ भी लिखा जा सकता है, और फोरेंसिक रिपोर्ट भी यह नहीं बता सकती की यह डुप्लीकेट है, और इसका इस्तमाल सबसे ज्यादा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में होता है |आपको पता होना चाहिए निरुपमा का भाई इनकम टैक्स ऑफिसर है|
८) निरुपमा का 'सुसाइड नोट' निरुपमा के घर से मिला है,पुलिस को निरुपमा के घर वालों का हैण्ड राइटिंग मैच करवाना चाहिए था, लेकिन पुलिस निरुपमा के दोस्तों का हैण्ड राइटिंग चेक करने में लगी है क्यों ???
९) निरुपमा के गले का निशान उसके दुप्पटे से मैच नहीं करता, तो फिर निरुपमा के घर वाले यह कैसे बोल रहें हैं की निरुपमा ने इसी से सुसाइड कर लिया
१०)अंकिता ने जब प्रियभांशु को बताया की निरुपमा की मौत हो गयी तो प्रियभांशु ने कोडरमा पुलिस को जांच परताल करने को कहा लेकिन पुलिस फ़ोन पे मौत की जानकारी होने के चार घंटे बाद निरुपमा के घर गयी और चुप चाप से लौट गयीं पुलिस ने उसी वक़्त डेड बॉडी को कब्जे में क्यों नहीं लिया ?
११)हॉस्पिटल में जिस डोक्टर ने निरुपमा के बॉडी को रिसीव किया था उनका कहना है की जो लोग निरुपमा की डेड बॉडी को लेकर हॉस्पिटल आये थे वह लोग लोकल पब्लिक नहीं थे तो फिर वोह लोग कौन थे जो निरुपमा के डेड बॉडी को लेकर हॉस्पिटल गए

Rajnish ने कहा…

२४)आपने लिखा है की पूरी रिपोर्ट आने में तीन से चार माह का समय लग सकता हैं।ऐसा हुआ तो कोडरमा पुलिस निर्धारित 90 दिनो के अंदर चारशीट दायर नही कर पायेगी,ऐसे हलात में निरुपमा की माँ को जमानत मिल जायेगी। यही तो प्री-प्लानिंग है कोडरमा पुलिस की तभी तो निरुपमा के कपडे और किताबें इतने समय बाद, १७ मई को भेजा गया फोरेंसिक जांच के लिए और अभी तो निरुपमा का लैपटॉप खोला भी नहीं गया है जांच के लिए, पुलिस केस की जांच कर रही है या केस को दबाने में लगी है, पुलिस का रवैया को देख कर तो यही लगता है की पुलिस केस को दबाने में लगी है |
२५)प्रियभांशु ने कोर्ट में सीबीआई जांच के लिए आवेदन दिया था,जबकि कोडरमा पुलिस नहीं चाहती की इस केस की जांच सीबीआई करे इसलिए कोडरमा पुलिस ने कोर्ट को बताया की जांच सही चल रही है और सीबीआई जांच की जरूरत नहीं, इस घटना के एक महीने बीत जाने पर भी कोडरमा पुलिस ने केस को सोल्व नहीं किया तो क्या कोडरमा पुलिस को अब यह कहने का हक़ है की जांच सही चल रही है ???
२६) सीआईडी ने निरुपमा की माँ को रिमांड पे लेने की कोशिश की थी पूछताछ के लिए जिसका कोडरमा पुलिस और निरुपमा की माँ के वकील ने विरोध किया क्यों ???
२७)आपने अपने आर्टिकल में लिखा था की निरुपमा ने पलंग पे बैठ कर दुपते से फांसी लगाया था इसलिए निरुपमा के माँ ने अकेले ही निरुपमा का दुप्पटा खोल कर निरुपमा का डेड बॉडी नीचे उत्तार लिया, अगर एसा है तो फिर निरुपमा के गले पे जो निशान बना है वह निशान दुपट्टे से मैच क्यों नहीं कर रहा ?
२८) इंसान की मौत जिस कंडीशन में होती है उसकी डेड बॉडी भी उसी कंडीसन में रहती है निरुपमा का डेड बॉडी बिल्कुल सीधा था, एम्स के डॉक्टरों ने भी कहा था की निरुपमा की मौत जिस वक़्त हुई उस वक़्त निरुपमा की बॉडी बिल्कुल सीधा रहा होगा, एम्स के डॉक्टरों ने यह भी सवाल पूछा था की अगर निरुपमा ने आत्महत्या किया तो निरुपमा के गले की हड्डी क्यों नहीं टुटा, निरुपमा के गले पे जो निशान बना था वह निशान भी फांसी लगाने का नहीं था, जब कोई इंसान खुद फांसी लगता हैतो उसके गले पे निशान जरूर बनता है लेकिन इतना गहरा निशान नहीं बनता जितना की निरुपमा के गले पे था, इस तरह का निशान तभी बनता है जब इंसान के मत के बाद उसका गला घोटा जाए|
३०) इस केस के चार अहम् सुराग जिसकी न तो पुलिस तलाश कर रही है और नहीं पाठक परिवार इसके बारे में कुछ बताने को तैयार है | १) निरुपमा की दिल्ली वापसी का रिसेर्वेसन किसने कब और क्यों कैंसल करवाया ? २) निरुपमा का मोबाईल कहाँ है ? ३) निरुपमा के मोबाईल का सिम कहाँ गया ? ४) जैसा की निरुपमा ने प्रियभांशु को एसएम्एस भेजा था की उसक भाई पिताजी और माँ उस पर लगातार नज़र रखते हैं इसलिए उसे बाथरूम में जाकर एसएम्एस करना पड़ता है, पाठक परिवार का कहना है की वह घर पर नहीं था तो फिर वह कौन लोग थे जो निरुपमा पर लगातार नज़र रख रहे थे ???
क्या आपने प्रियभांशु को दोषी ठहराने से पहले इन बातों की जांच परताल किया ????
३१) अगर निरुपमा ने आत्महत्या की तो पाठक परिवार इसके लिए दोषी को सजा दिलाने के वजाये केस को दबाने में क्यों लगा हुआ है ??
३२) आपने अपने आर्टिकल में लिखा था की किसी ने निरुपमा को २९ अप्रैल को सुबह में देखा था , क्या पुलिस ने उन लोग को रिमांड पे लेकर पूछताछ किया जो निरुपमा को २९ अप्रैल की सुबह देखने का दावा करता है ?
३३)क्या पुलिस ने उन लोग को रिमांड पे लेकर पूछताछ किया जो निरुपमा की डेड बॉडी को लेकर हॉस्पिटल गए थे ??

hem pandey ने कहा…

न्याय हो, यही कामना है. आमजन उतना ही जान पाता है जितना मीडिया बता दे.